घुटने प्रत्यारोपण सर्जरी के बिना 100 साल तक अपने घुटनों को कैसे सुरक्षित रखें
कई लोग सोचते हैं कि घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस होने पर अंत में घुटने प्रत्यारोपण सर्जरी करवानी ही पड़ती है। लेकिन यदि घुटने की संरचना को सही तरीके से समझा जाए और सही जीवनशैली व व्यायाम अपनाए जाएँ, तो बिना सर्जरी के भी 100 साल तक घुटनों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
- घुटने की मुख्य संरचना को समझना
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले उनकी संरचना को समझना ज़रूरी है। घुटना हड्डियों, लिगामेंट्स और हड्डियों की सुरक्षा करने वाले दो प्रकार के कार्टिलेज से बना होता है।

लिगामेंट (क्रूसिएट और कोलेटरल लिगामेंट) हड्डियों को एक‑दूसरे से जोड़कर रखते हैं। विशेष रूप से क्रूसिएट लिगामेंट घुटने को आगे‑पीछे अत्यधिक हिलने से रोकता है। जब क्रूसिएट लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो घुटना ढीला पड़ जाता है और ऑस्टियोआर्थराइटिस तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए सावधानीपूर्वक देखभाल आवश्यक है।
मेनिस्कस (नरम उपास्थि): यह घुटने की हड्डियों के बीच स्थित अर्धचंद्राकार (घोड़े की नाल जैसी) उपास्थि होती है। बस में चढ़ते समय अचानक ताकत खत्म होकर बैठ जाना, या मेनिस्कस फट जाने पर जिसे आर्थोस्कोपी से ठीक किया जाता है—वही यह मेनिस्कस है।
जोड़ों का उपास्थि: यह लगभग 3 मिमी मोटी (दो सिक्कों जितनी मोटाई) उपास्थि होती है जो हड्डियों के सिरों को ढकती है। यह उपास्थि हड्डियों के बीच कुशन का काम करती है, और जब यह घिस जाती है तो ऑस्टियोआर्थराइटिस तेजी से बढ़ सकता है।
- ऑस्टियोआर्थराइटिस के चरण (KL ग्रेड)
अस्पतालों में आमतौर पर बताए जाने वाले घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के चरण X‑रे परिणामों के आधार पर निर्धारित किए जाने वाले KL ग्रेड (Kellgren–Lawrence ग्रेड) को दर्शाते हैं।
चरण 1: घुटने की हड्डियों का संरेखण सामान्य होता है और कोई नुकीले अस्थि‑उभार नहीं होते। उपास्थि बिना किसी क्षति के अच्छी तरह संरक्षित रहती है, और हड्डियों के बीच की दूरी चौड़ी और साफ बनी रहती है।
चरण 2: जोड़ों की जगह हल्के रूप से संकरी होने लगती है।
चरण 3: जोड़ों की जगह स्पष्ट रूप से संकरी हो जाती है, और हड्डियों के आपस में रगड़ने से हड्डी में सफेदी जैसी “स्क्लेरोसिस” दिखाई देती है। अस्थि‑उभार (बोन स्पर) भी अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इस चरण में दैनिक गतिविधियों के दौरान भी दर्द महसूस होता है और इंजेक्शन या आर्थोस्कोपी जैसे अधिक सक्रिय चिकित्सा उपचारों की आवश्यकता पड़ सकती है।
चरण 4: हड्डियाँ पूरी तरह एक‑दूसरे से चिपक जाती हैं। मुख्य रूप से अंदरूनी जोड़ घिस जाता है, जिससे पैर “O आकार” में मुड़ने लगते हैं, और रात में भी तेज दर्द बना रहता है। आमतौर पर इसी चरण में घुटने प्रत्यारोपण सर्जरी पर विचार किया जाता है।

※ सर्जरी का निर्णय लेते समय ध्यान देने योग्य बातें
भले ही एक्स‑रे में चरण 4 दिखे और हड्डियाँ एक‑दूसरे से चिपकी हों, यदि रोगी की उम्र अधिक है (जैसे 60 के शुरुआती या मध्य वर्ष) और उसे ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता, तो तुरंत सर्जरी करवाने की आवश्यकता नहीं है। सर्जरी का निर्णय रोगी द्वारा महसूस किए जाने वाले वास्तविक दर्द और दैनिक जीवन में होने वाली असुविधा को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
- घुटनों को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख कारण और सही जीवनशैली की आदतें
घुटने के जोड़ में क्षति होने पर सबसे पहले और सबसे अधिक खराब होने वाला हिस्सा घुटने के पीछे का नरम उपास्थि (मेनिस्कस का पिछला भाग) होता है।
झुककर बैठने की मुद्रा से बचें: घुटने को गहराई से मोड़ना या घुमाना घुटने के पीछे की उपास्थि पर अत्यधिक दबाव डालता है और नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए फर्श पर बैठकर किए जाने वाले घरेलू कामों से जितना हो सके बचना चाहिए और फर्श पर रहने की आदत की जगह कुर्सी और बिस्तर का उपयोग करने वाली जीवनशैली अपनानी चाहिए।
अत्यधिक चलने से बचें: कई लोग मानते हैं कि चलना घुटनों के लिए अच्छा है और दर्द होने पर भी रोज़ 10,000–20,000 कदम चल लेते हैं, जिससे घुटनों पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव पड़ता है। यदि दर्द महसूस हो, तो चलने का समय और दूरी तुरंत कम करनी चाहिए। ट्रेकिंग या चलना जैसे सभी व्यायाम तभी लाभकारी होते हैं जब वे बिना दर्द और सुरक्षित सीमा के भीतर किए जाएँ।

- घुटनों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित शक्ति‑वर्धक व्यायाम विधियाँ
घुटने के जोड़ पर भार कम करने के लिए जांघ के सामने स्थित क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों को मजबूत करना आवश्यक है।
क्वाड्रिसेप्स मजबूत करने का व्यायाम (पैर उठाना): यदि स्क्वाट करते समय घुटने के आगे दर्द होता है, तो व्यायाम बदलना चाहिए। कुर्सी पर सीधा बैठें, घुटने को सीधा करके पैर उठाएँ, थोड़ी देर रोकें और फिर नीचे करें। यह व्यायाम घुटने को मोड़े बिना और जोड़ पर दबाव डाले बिना जांघ की मांसपेशियों को प्रभावी रूप से मजबूत करता है।
सुरक्षित स्क्वाट: यदि आप स्क्वाट छोड़ नहीं सकते, तो हल्का स्क्वाट (मिनी स्क्वाट) करें जिसमें कूल्हों को थोड़ा पीछे ले जाएँ और घुटने पैर की उंगलियों से आगे न जाएँ।
इनडोर साइक्लिंग: बाहर साइकिल चलाने में गिरने या अचानक होने वाली स्थितियों के कारण जोड़ों या हड्डियों को चोट लगने का जोखिम अधिक होता है। इसलिए, बिना किसी अप्रत्याशित जोखिम के सुरक्षित रूप से पैर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए स्टेशनरी (इनडोर) साइकिल की सलाह दी जाती है।

गंगनम YK अस्पताल 02-6967-8200 윤재웅 #घुटने का स्वास्थ्य #आर्थोपेडिक विशेषज्ञ
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