डेंटल इम्प्लांट में दांतों और मसूड़ों के बीच की सफाई सबसे महत्वपूर्ण है।
बहुत कम दंत‑क्लिनिक ऐसे हैं जो इम्प्लांट के बाद देखभाल के तरीकों को स्पष्ट रूप से समझाते हैं। अधिकांश क्लिनिक इम्प्लांट लगाने पर ध्यान देते हैं और उसके बाद की देखभाल केवल संक्षेप में बता कर समाप्त कर देते हैं। इम्प्लांट की संरचना प्राकृतिक दाँतों से अलग होती है। गुरो यूडी डेंटल क्लिनिक के डॉ. ली सांग‑चिल ने इंटरव्यू में बताया कि “प्राकृतिक दाँतों के विपरीत, इम्प्लांट की सतह और मसूड़े के बीच एक छोटा सा अंतर होता है, और यदि इस अंतर में भोजन फँस जाए तो सूजन हो सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि कई मरीज केवल दाँत की चिकनी सतह को ही ब्रश करते हैं। स्केलिंग का महत्व…