50–60 की उम्र में आंखों की उम्र बढ़ना तेज क्यों होता है? निचली और ऊपरी पलक की सर्जरी
हमने मेड यंग प्लास्टिक सर्जरी के डॉ. पार्क ब्योंगचान से मुलाकात की और 50–60 वर्ष के मरीजों द्वारा सबसे अधिक बताई जाने वाली आंखों की उम्र बढ़ने की समस्याओं पर चर्चा की. परामर्श के दौरान बार‑बार सामने आने वाली चिंताएँ…
मरीज अक्सर कहते हैं, “मेरी आंखों का आकार बदल गया है” या “मेरी पलकें ढीली हो गई हैं।” डॉ. पार्क ने शारीरिक संरचना के आधार पर बताया कि चेहरे में आंखों के आसपास का हिस्सा सबसे पहले क्यों बूढ़ा होता है और प्राकृतिक व युवा लुक वापस पाने के लिए इसे कैसे सुधारा जा सकता है.

उन्होंने बताया कि आंखों के आसपास का हिस्सा उम्र बढ़ने के प्रति अधिक संवेदनशील होता है क्योंकि इसकी संरचनात्मक कमजोरियाँ होती हैं.
• आंखों के आसपास की त्वचा और मांसपेशियाँ चेहरे के अन्य हिस्सों की तुलना में बहुत पतली होती हैं.
• यह बाहरी刺激 और बार‑बार होने वाली हरकतों के प्रति संवेदनशील होता है.
• आंख के दोनों ओर सहारा देने वाली संरचनाएँ समय के साथ झूले (हैमक) की तरह ढीली होकर नीचे की ओर झुक जाती हैं.
कई दशकों तक आंखें खोलने‑बंद करने की दोहराई जाने वाली हरकतें इन सहायक संरचनाओं को धीरे‑धीरे ढीला कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप डबल पलक के आकार में बदलाव, आंखों का धंसा हुआ दिखना और आंखों के नीचे चर्बी का उभरना जैसी समस्याएँ दिखाई देती हैं.

– ऑर्बिटल सेप्टम के कमजोर होने से होने वाली आंखों के नीचे की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया
आंखों के नीचे की चर्बी को घेरकर सहारा देने वाला ऑर्बिटल सेप्टम एक तरह की “थैली” की तरह काम करता है. जब यह थैली कमजोर हो जाती है, तो चर्बी आगे की ओर धकेली जाती है और आसपास की त्वचा, मांसपेशियाँ और फेशिया भी एक साथ अपनी लोच खो देते हैं, जिससे आंखों के नीचे उम्र बढ़ने के सामान्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है. इन शारीरिक परिवर्तनों को सही तरीके से समझकर और सुधारकर, व्यक्ति कम से कम दस साल छोटा दिख सकता है. इसका सबसे प्रभावी समाधान निचली पलक की सर्जरी है.

-निचली पलक की सर्जरी केवल चर्बी हटाने की प्रक्रिया नहीं है.
50–60 की उम्र में आंखों के नीचे की समस्या सिर्फ चर्बी उभरने तक सीमित नहीं होती; उसके नीचे का हिस्सा धंसा हुआ और छायादार भी दिखता है. इसलिए केवल चर्बी हटाने से यह समस्या कभी हल नहीं होती. निचली पलक की सर्जरी में निम्नलिखित तरह की संयुक्त सुधार तकनीकों की आवश्यकता होती है.
• उभरी हुई चर्बी को धंसे हुए हिस्सों में पुनः स्थानांतरित करना
• ढीले हो चुके ऑर्बिटल सेप्टम को मजबूत करना
• ढीले पड़ चुके एग्यो‑सल मांसपेशी (ऑर्बिक्युलरिस) को दोबारा स्थिर करना
• ढीली हो चुकी त्वचा को हटाना
इस प्रक्रिया के माध्यम से प्राकृतिक वक्र बनाना और आंखों के नीचे की चमकदार व ताज़ा दिखने वाली उपस्थिति को वापस पाना संभव है.

-आंखों के ऊपरी हिस्से की उम्र बढ़ना: भौंहों का झुकना और ऊपरी पलक में बदलाव
बुढ़ापा केवल आंखों के नीचे ही नहीं होता. उम्र बढ़ने पर माथे की मांसपेशियाँ और SMAS फेशिया गुरुत्वाकर्षण के कारण ढीली होकर नीचे की ओर खिसकती हैं, जिससे भौहें भी नीचे आ जाती हैं. भौहें नीचे आने पर ऊपरी पलक की त्वचा नीचे धकेली जाती है, जिससे आंखें छोटी दिखती हैं और चेहरा भारी व थका हुआ लगता है. इसके बाद लोग अनजाने में आंखें खोलने के लिए माथे की मांसपेशियों का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे माथे की झुर्रियाँ और गहरी होती जाती हैं और यह दुष्चक्र दोहराता रहता है.
आंखों के आसपास की उम्र बढ़ने को सुधारने के तीन शल्य चिकित्सा तरीके इस प्रकार हैं:
✔ 1) माथा लिफ्ट (Forehead lift)
जब भौंहों का झुकना मुख्य कारण होता है, तो यह सबसे मूलभूत समाधान है। एंडोस्कोपी की मदद से ढीली पड़ी माथे की मांसपेशियों और फेशिया को अलग करके मजबूती से स्थिर किया जाता है, जिससे नीचे आई भौहें अपनी मूल स्थिति में लौट आती हैं। बिना ज़ोर लगाए आंखें स्वाभाविक रूप से खुलती हैं और साथ ही माथे व भौंहों के बीच की झुर्रियाँ भी सुधरती हैं.
✔ 2) सब‑ब्रो लिफ्ट (भौंह के नीचे लिफ्ट)
यह तरीका तब उपयुक्त होता है जब भौंह की स्थिति सामान्य हो, लेकिन केवल ऊपरी पलक की त्वचा ढीली हो गई हो। भौंह के ठीक नीचे की रेखा के 따라 केवल ढीली त्वचा को सटीक रूप से हटाया जाता है और फेशिया को मजबूती से स्थिर किया जाता है। मूल आंखों का आकार नहीं बदलता, इसलिए चेहरे की छवि में बहुत कम बदलाव होता है और निशान भौंह के नीचे स्वाभाविक रूप से छिप जाता है.
✔ 3) ऊपरी पलक की सर्जरी (Upper blepharoplasty)
ऊपरी पलक वह क्षेत्र है जहाँ बुढ़ापा बहुत तेज़ी से दिखाई देता है। त्वचा ढीली हो जाती है, वसा और मांसपेशियाँ सिकुड़ जाती हैं, और आंख खोलने की शक्ति भी कम हो जाती है.
ऊपरी पलक की सर्जरी (Upper blepharoplasty) वह प्रक्रिया है जिसमें
• त्वचा निष्कर्षण (Skin excision)
• डबल पलक फिक्सेशन (Double‑eyelid fixation)
• वसा पुनर्स्थापन (Fat repositioning)
• ऊपरी पलक उठाने वाली मांसपेशी को मजबूत करने की प्रक्रिया भी साथ में की जाती है, जिससे दृष्टि में सुधार होता है और आंखें अधिक स्पष्ट व परिभाषित दिखती हैं.
आंखों की उम्र बढ़ना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पूरी संरचना बदलती है। क्योंकि आंखों के आसपास की त्वचा, मांसपेशियाँ, वसा और फेशिया एक साथ बदलते हैं, इसलिए दूसरों की नकल करने के बजाय अपने लिए उपयुक्त व्यक्तिगत सर्जरी चुनना सबसे महत्वपूर्ण है.
आंखों की उम्र बढ़ना केवल सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन है, इसलिए सटीक निदान और शारीरिक‑रचना आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है.

(मेड यंग प्लास्टिक सर्जरी क्लिनिक, निदेशक पार्क ब्युंग‑चान)
📌 अक्सर पूछे जाने वाले मुख्य प्रश्न
Q1. आंखों के आसपास का क्षेत्र सबसे जल्दी क्यों बूढ़ा होता है?
A. आंखों के आसपास की त्वचा और मांसपेशियाँ पतली होती हैं, और सहायक संरचनाएँ कमजोर होती हैं, इसलिए बार‑बार की हरकतों से यह क्षेत्र आसानी से ढीला पड़ जाता है।
Q2. आंखों के नीचे सूजन या उभार आने का कारण क्या है?
A. मुख्य कारण यह है कि ऑर्बिटल सेप्टम कमजोर हो जाता है, जिससे वसा आगे की ओर उभर आती है.
Q3. 50–60 की उम्र में आंखों के नीचे होने वाली उम्र बढ़ने की समस्या को कैसे सुधारा जा सकता है?
A. वसा पुनर्वितरण, ऑर्बिटल सेप्टम को मजबूत करना और ढीली त्वचा को हटाना—इन सभी को मिलाकर किया गया सुधार सबसे प्रभावी होता है.
Q4. ऊपरी पलक (ऊपरी पलक क्षेत्र) में ढीलापन क्यों होता है?
A. जब माथा और फेशिया ढीले पड़ते हैं, तो भौहें नीचे आ जाती हैं, जिससे पलक की त्वचा आंखों को ढक लेती है और आंखें भारी व थकी हुई दिखने लगती हैं.
Q5. किस प्रकार की सर्जरी चुननी चाहिए?
A. यह कारण पर निर्भर करता है.
- माथे का ढीलापन → माथा लिफ्ट सर्जरी
- केवल पलक की त्वचा ढीली हुई है → भौंह के नीचे की लिफ्ट सर्जरी
- ऊपरी पलक की स्वयं की उम्र बढ़ना → ऊपरीपलकसर्जरी
मेड यंग प्लास्टिक सर्जरी क्लिनिक की वेबसाइट https://midlife.made-young.com